क्या होता तथाकथित 'हिन्दुवादिओं' का अगर १९४७ में देश नहीं बंटता ?


जो हिंदूवादी भारत में १४ % मुसलामानों के डर से कांपते रहते हैं उनका क्या होता अगर १९४७ में देश नहीं बंटता तो ? देशका बंटवारा नहीं होने की सूरत में देश की धार्मिक जनसंख्या क्या होती आइये देखें I नीचे दी गई सारणी में, वर्ष २०१७ की संभावित जनसँख्या (जो की तीनों देश की अंतिम जनगणना  को आधार मान कर उसके बाद की जनसँख्या में बढ़ोत्तरी के हिसाब से है) इस प्रकार होती-

Hindu+
Muslim
Christian
Misc
Total
India
105
20
3
2
130
Pakistan
0.5
20
0.25
0.25
21
Bangladesh
1.75
15

0.25
17
Total
107.25
55
3.25
2.50
168
Undivided India
Percentage
63.75
32.75
2
1.5
168
*सारे आंकड़े 'करोड़' में है.   Hindu+ का मतलब हिन्दू सिख, जैन , बौद्ध आदि है
इन आकड़ों से साफ़ है अखंड भारत में मुसलमान एक तिहाई होते अर्थात २ हिन्दुओं पर एक मुसलमान होता ! तब क्या ये डरपोक 'हिंदूवादी' घर से बाहर  नहीं निकलते ! तब क्या बाबरी मस्जिद टूटती या राम मंदिर को लेकर इतना शोर शराबा होता या अगर बीजेपी का अस्तित्व होता तो क्या ये तुष्टिकरण की झूठी बातें कर सकते जैसा की अभी करतें हैं ! आखिर  ये, तथाकथित राम राम की रट लगाए हुए 'हिंदूवादी', मुसलामानों से इतने घबराये क्यों है ? दर असल इनके मनमे पाप है इसलिए ये घबराये हुए हैं ! क्या पाप है ? पाप यह है की हिन्दुओं को धर्म के नाम से गुदगुदाकर सारे भोट  हड़प लें और फिर 'पुजारी' राज  लाकर धर्म के नाम से लोगों को डरा डरा कर अपनी गोटी फिट करते रहें। तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में सच ही कहा है 'जाँकि  रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखि तिन तैसी' ! याद रहे BJP -RSS भगवा वालों, राम के नाम को बदनाम कर आपलोग अन्ततगोत्वा इतिहास के गड्ढे में ही गिरेंगे ! भगवान् राम भी  आपलोगों को विराम ही देंगे I हम देशप्रेमी हिन्दूस्तानी भगवान् को बदनाम करनेवाले हिन्दुओंसे टक्कर लेने तैयार है ! तैयार रहें २०१९ के लिए !!





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