आतंकवाद के बदलते चेहरे
आतंकवाद या उग्रवाद का कोई धर्म नहीं होता। ऐतिहासिक रूप से विभिन्न धर्म या जाति समय समय पर आतंकवाद से ग्रसित रही है। जैसे इस समयकाल में इस्लामिक आतंकवाद के चर्चे दुनिया भर में हैं I वैसे ही महज ७५ वर्ष पहले द्धितीय विश्व युद्ध के काल में अडोल्फ़ हिटलर के राष्ट्रीय आतंकवाद का खौफ पूरी दुनिया पर छाया हुवा था।
अडोल्फ हिटलर (२० अप्रैल १८८९ - ३० अप्रैल १९४५) एक जर्मन राजनेता एवं तानाशाह थे। उन्होंने “मेइन कैम्फ”(मेरा संघर्ष) नामक अपनी आत्मकथा में लिखा कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं। उन्हें विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। यहूदी सदा से आर्य संस्कृति में रोड़ा अटकाते आए हैं। जर्मन लोगों को साम्राज्यविस्तार का पूर्ण अधिकार है । उन्होंने स्वस्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो कि हिन्दुओ का भी शुभ चिह्र है I
राष्ट्रीय उग्रवाद का नया रूप द्धितीय विश्वयुद्ध में हिटलर ने दिखाया। जर्मनी और यूरोप में यहूदी एक आर्थिक रूप से सम्पन्न व बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में प्रतिष्ठित हो चूके थे (जैसे की भारत में गुजराती, पंजाबी, मारवाड़ी आदि हैं)। अडोल्फ़ हिटलर युवावस्था से ही इस बात से जलता था और उसने समय आने पर यहूदी और दूसरे अनार्यों को सबक सिखाने की ठान ली थी। हिटलर ने यहूदियों व साम्यवादियों को प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार के लिए दोषी ठहराया I द्धितीय विश्व युद्ध की शुरुआत कर हिटलर को प्रथम विश्व युद्ध की हार का बदला लेने और यहूदी व दूसरे अनार्यों को जर्मनी सहित पुरे यूरोप से समाप्त करने का मौका मिल गया।
आजतक के इतिहास में अडोल्फ़ हिटलर के जैसा विनाशकारी और क्रूर पुरुष इस धरा पर नहीं जन्मा। दुःख की बात तो यह है कि हिटलर न सिर्फ आर्य था बल्कि शाकाहारी भी थाI आर्य शब्द का संस्कृत में अर्थ होता है 'महान' I
पर द्धितीय विश्वयुद्ध में इस 'महान' व्यक्ति ने ६० लाख यहूदिओं को तरह तरह की यातनायें दे कर की हत्या की। यहूदिओं और दूसरे अनार्यों से अपनी कब्र खुदवाकर जिन्दा दफन करने से लेकर, ज़िंदा जलाना, लाइन में खड़ा करके एक एक कर कान में गोली मारना, गैस चेम्बर में नंगा करके एक साथ १००-१५० लोगों को मार डालना, एक को लिटाकर गोली मारने के बाद उसके ऊपर दूसरे को और फिर तीसरेको गोली मारना, भूखा प्यासा रखकर मारना आदि आदि । औरतों और बच्चों पर तो बेइंतहा जुलुम किया गया जिसके रोंगटे खड़े कर देने वाले विवरण इंटरनेट पर और द्धितीय विश्व युद्ध की किताबों में पढ़ने को मिल सकतें है।
अंतमे साम्यवादियों से नफरत हिटलर को ले डूबी। जर्मनी ने पहली पराजय कम्युनिस्टों के हाथों झेली और अंत में सोवियत आर्मी सबसे पहले बर्लिन पहुंची और द्धितीय विश्वयुद्ध समाप्त हुवा। बाकि बचा छिटपुट संघर्ष अमेरिकनों ने नागासाकी और हिरोशीमा पर एटम बम डाल कर समाप्त कर दिया।
हिटलर ने अपनी ‘जातिवादी अहंकार’ की नीति के कारण पुरे योरोप में ६० लाख यहूदी और ५० लाख दूसरे अनार्यों को लेकर लगभग 1करोड़ 10 लाख लोगों को भयानक क्रूरता से यातनाएं देकर मार डाला I दुसरे विश्व युद्ध के कारण लगभग 6 करोड़ लोगो ने अपनी जान गवाई थी जिसके लिए भी हिटलर ही जिम्मेदार था क्यों की दूसरा विश्वयुद्ध उसीकी देन थीI
दूसरी और नज़र डालें तो महात्मा गांधी जैसे युगपुरुष की हत्या किसी हिन्दू ने ही की थी। राजीव गांधी की हत्या भी श्रीलंकाई हिन्दू आतंकवादी संगठन LTTE ने करी थी और इंदिरा गांधी का हत्यारा भी कोई मुसलमान न था। असम का हिन्दू आतंकवादी संगठन ULFA भी स्वतंत्र असम की मांग को लेकर दो दसक से असम खून खराबा मचा रक्खा था और कश्मीर में सीमापार से आये मुसलमान आतंकवादीयों ने वहां के हिंदू पंडितों को तो घाटी से खदेड़ ही दिया जो की आज ३० साल विस्थापित जिंदगी बिताने के बाद भी कश्मीर घाटीमें अपने घर नहीं लौट पाये।
८० के दसक का सिक्खों का खालिस्तानी आंदोलन भी पूरी तरह आतंकवादी आंदोलन ही था जिसकी बलिबेदी पर इंदिरा गांधी चढ़ गई। बदलेकी भावना से दिल्ली में हजारों सिक्खों का कत्लेआम हुवा। आज भी भारत में नक्शली-माओवादी संगठन समय समय पर खून खराबा करते रहे हैं।
ऊपर मैंने आर्य, हिन्दू, मूसलमान, सिख आदि जातिवादी शब्दों का इस्तेमाल किया है जोकि अनुचित है। पर यह समझाने के लिए की आतंकवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती (जैसा की इस लेख के प्रथम पैरा में लिखा हुवा है) इन शब्दावलियों का प्रयोग किया गया है।
भारतीय आर्यगण बहुत ही सहनशील है इसमें कोई दो राय नहीं। भारत की इसी भूमि पर सर्वश्रेष्ठ आर्य पुरुष भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था और दुनिया को नीति का पाठ पढ़ाया था। पाकिस्तानी भी आर्य है और नेपाल, ईरान आदि राष्ट्र भी आर्यसभ्यता से ही पुष्ट है। भारत में हिन्दू, मुसलमान, सिख ईसाई आदि सभी के पूर्वज मूलतया एक ही है और इस रिस्तेसे हम सभी भाई भाई ही हैं । पर चूँकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता अतः सभी धर्मों में कभी कभी कुछ सिरफिरे आतंकवादको जन्म दे देतें है एवं धर्म के नाम का इस्तेमाल कर आतंकवाद को पुष्ट करतें रहतें हैं और हम भ्रम पाल बैठतें है की अमुक धर्म वाले तो आतंकवादी होतें हैं। हमें इसप्रकार के सोच से उबर कर आतंकवाद से लड़ना चाहिए न की धर्म विशेष को दोषी ठहराना चाहिये I
भारत की आवादी इस समय करीब १३० करोड़ है जिसमे हिन्दू मुसलमान, सिख , ईसाई के अलावा और भी सैकड़ों जाति धर्म के लोग रहतें है । विश्व में भारत ही एक मात्र देश है जिसमें इतने प्रकार के जाति-धर्म के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं।
अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को आतंकवादियों ने ध्वस्त किया। उधर आतंकवाद की जन्मस्थली पाकिस्तान अपने ही आतंकवाद की चपेट में झुलस रहा है। आतंकवादी तो सगे भाइयों को भी नहीं बक्सते। पर भारत ने अपने संविधान व अपने सेकुलरिज्म की नीति के चलते विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई और सफलता से हर आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है ।
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