क्या ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की बांग्लादेशी हिंदुओं के प्रति कोई जिम्मेदारी है?
इस विषय पर विचार करनेसे पहले हर भारतीय को यह समझ लेना जरुरी है की, “बांग्लादेश में हिन्दू बंगालियों की सुरक्षा सीधी पश्चिम बंगाल के मुसलमान बंगालीयों की सुरक्षा से जुडी हुई है”. बांग्लादेश में १ करोड़ ७० लाख हिन्दू हैं जो की वहां की आबादी का १०.७ % है । दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में मुसलमान की आबादी करीब २ करोड़ ५० लाख है जो की कुल आबादी का २७% है।
जाहिर है की पश्चिम बंगाल में कोई भी प्रकार की बड़ी सांप्रदायिक घटना जिससे बंगाली मुसलमानों को जान माल का नुक्सान उठना पड़े, उससे उसी प्रकार के दंगे बांग्लादेश में भी हो सकतें है जिससे वहां के बंगाली हिन्दुओं को भी जान माल का नुक्सान उठाना पड़ सकता है। इसके परिणाम स्वरुप बांग्लादेश से बड़ी संख्या में हिन्दू शरणार्थी फिर से पश्चिम बंगाल में आ सकतें है।
इसलिए बंगाल सरकार और ममता बनर्जी को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि पश्चिम बंगाल में किसी भी बड़ी सांप्रदायिक हिंसा की घटना न घटे। सौभाग्य से पश्चिम बंगाल के हिन्दू बंगाली और मुसलमान बंगाली दोनों ही शांत स्वभाव के हैं जिसकी वजह से स्वाधीनता के बाद से पश्चिम बंगाल में किसीभी प्रकार के साम्प्रदायिक दंगे नहीं हुये। पर इन दिनों बीजेपी के दिल्ली में क्षमता में आने से नए उत्साह के साथ बीजेपी के बंगाल में डेरा डालने के बाद से यहाँ हिन्दू मुसलमान की बीच दरार पैदा की जा रही है जिससे इन दिनों कुछ छिटपुट सांप्रदायिक दंगे बंगाल में हुए हैं ।
यहाँ उल्लेखनीय है की पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की जनता का सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत गहरा है। जैसे दोनों ही जगह की मातृ भाषा तो बांगला है ही इसके अलावा भारत के एक महान सपूत रविंद्र नाथ ठाकुर ने भारत के साथ साथ बांग्लादेश का भी राष्ट्र गान लिखा है। भारत व पश्चिम बंगाल के ही एक और सपूत काज़ी नजरुल इस्लाम जिनकी कविताएं बांग्लादेशी मुक्ति योद्धा व अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय सशस्त्र लड़ाकों को प्रेरणा देती रही है और जिन्हे पश्चिम बंगाल में "बिद्रोही कवि" कहा जाता रहा है उन्हें भी बांग्लादेश का 'राष्ट्रकवि' का पद से नवाजा गया।
कृपया देंखे -Kazi Nazrul Islam - Wikipedia
पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश दोनो की इस सांस्कृतिक जुड़ाव व दोनों जगहों पर धार्मिक मेलमिलाप के चलते कोई भी सरकार पश्चिम बंगाल में आये चाहे वो कांग्रेस हो या कम्युनिस्ट या फिर ममता बनर्जी की TMC, सबकी ही यह जवाबदेही बनती है की बंगाल की कानून व्यवस्था दोनों ही धार्मिक समूह का बराबर ध्यान रक्खे व सांप्रदायिक सतभाव बनायें रक्खे। जाहिर है कि अगर हिन्दुओं को बड़ी सुविधायें प्रदान कर "खुशामद (Appeasement)" किया जाये तो मुसलामानों को भी कुछ सुविधाएं देकर " खुशामद (Appeasement)" किया जाना उचित ही है।
पश्चिम बंगाल में तो बीजेपी का एक सूत्री कार्यक्रम है की मुसलामानों का "Appeasement" हो रहा है कहकर हिन्दुओं को गरमाया जाय ताकि हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण हो । और अगर पश्चिम बंगाल की कोई वारदात से बांग्लादेश से फिर से बड़े रूप में शरणार्थी आने लगे तो बीजेपी का क्या ? उन्हें तो बल्कि यह कहने का मौका मिल जाएगा की "देखो बांग्लादेश में हिन्दुओं पर कैसा जुल्म हो रहा है"!
अतः ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार का यह कर्तब्य बनता है की वह इस बात पर भी ध्यान रक्खे की बांग्लादेश के हमारे हिन्दू भाइयों की जान माल सुरक्षित रहे और इसके लिये जो भी कदम जरुरी हो उसे उठाते रहें।
Comments
Post a Comment