विवाहित कमाऊ कन्यांओं का माता-पिता के प्रति आर्थिक कर्तव्य
कन्याओं के बारे में बोला जाता है की कन्यायें दो कुलों की लाज रखती है , कन्यायें देवी स्वरूपा होती है। यह सच है की एक समय बहुओं पर बहुत अत्याचार होते थे। पीहर में भी कुंवारी लड़किओं पर पूरा भेद भाव बरता जाता था और पराये घर जाएगी कहकर उनपर काम का बोझ डाल दिया जाता था I और भी कई प्रकार से नारी को प्रताड़ित किया जाता था एवं उनकी ऊँची शिक्षा के बारे में तो कोई सोचता भी नहीं था। यही वजह है की समय समय पर स्त्रिओं की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के कानून बनाने पड़े जिसमे IPC Sec 498 A में बहुओं को बचाने के लिए विषेश प्रावधान बने। इसके अलावा कुंवारी लड़कियों व शादीशुदा औरतों की सुरक्षा के लिए Domestic Violence Act कानून भी बनाया गया I माता - पिता की संपत्ति में कन्याओं का अधिकार , पति की संपत्ति में शादी के बाद अर्जित धन पर आधा हिस्सा , यहाँ तक की कुछ समय पहले मिताक्षरा क़ानून में भी लड़कियों को पुस्तैनी संपत्ति मे हिस्सा देनेका प्रावधान बना। इसके अलावा तलाक शुदा के लिए गुजारा भत्ता के दो क़ानून तो है ही। ये सारे क़ानून बनाने का एक ही उद्...