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Showing posts from June, 2017

विवाहित कमाऊ कन्यांओं का माता-पिता के प्रति आर्थिक कर्तव्य

कन्याओं के बारे  में बोला  जाता है की कन्यायें दो कुलों की लाज रखती है , कन्यायें देवी स्वरूपा होती है। यह सच है की एक समय बहुओं पर बहुत  अत्याचार होते थे।  पीहर में भी कुंवारी लड़किओं पर पूरा भेद भाव बरता जाता था और पराये घर जाएगी कहकर उनपर काम का बोझ डाल  दिया जाता था I और भी कई प्रकार से नारी को प्रताड़ित किया जाता था एवं उनकी ऊँची शिक्षा के बारे में तो कोई सोचता भी नहीं था। यही वजह है की समय समय पर स्त्रिओं की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के कानून बनाने पड़े जिसमे IPC Sec  498 A में बहुओं को बचाने के लिए विषेश प्रावधान बने। इसके अलावा कुंवारी लड़कियों व शादीशुदा औरतों  की सुरक्षा के लिए Domestic Violence Act कानून भी बनाया गया I माता - पिता की संपत्ति में कन्याओं का अधिकार , पति की संपत्ति में शादी के बाद अर्जित धन पर आधा हिस्सा , यहाँ तक की कुछ समय पहले मिताक्षरा क़ानून में भी लड़कियों को पुस्तैनी संपत्ति मे हिस्सा देनेका प्रावधान बना। इसके अलावा तलाक शुदा के लिए  गुजारा भत्ता के दो क़ानून तो  है ही।  ये सारे  क़ानून बनाने का एक ही उद्...

15G-15H Forms of Income Tax are Pure Non-Sense

                                  The world is fighting climate change by progressively reducing green house gases. Reduction of use of paper is being contemplated to reduce deforestation and carbon footprint. Railways have started accepting digital tickets instead of paper tickets. Income Tax department too has drastically reduced use of paper submission of Income Tax returns and allied supporting paper submission. There are other working areas of various government departments which have gone digital, considerably reducing use of white papers.  However there is a highly grey area (we may even call it a black area!) of the Income Tax Department which makes it mandatory to use white papers. This causes use of billions of white papers without any or negligible commensurate benefit. I am talking about submission of 15G and 15H for accruable bank/post office or other form of interest or divid...

त्योंहार ‘प्यार’ का या ‘तनाव’ का

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षा बंधन का त्योंहार भाई बहन के प्रेम का प्रतिक हैं I इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी यानि रक्षा - सूत्र बांधती है और उनके माथे पर तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है I इस रक्षा सूत्र से बहने भाई के दीर्घ जीवन की कामना करते हुए भाई से अपनी रक्षा का वादा भी लेती है I भाई भी अपनी बहन की रक्षा के प्रतिक स्वरुप बहन को कुछ नगद रूपये देता है I यह था राखी का मूल स्वरुप जिसे हम सदियों से देखते आयें हैं I लेकिन आजकल इस त्योंहार का स्वरुप   कुछ बदल गया है और आजकल बहने राखी के साथ काफी उपहार भी लाने लगी है I इन उपहारों में भाई के परिवार के छोटे बड़े सभी सदस्यों के लिये कुछ न कुछ रहता है यानि बहने हजारों रूपये   उपहारों पर खर्च कर डालती है I इन उपहार रूपी दिखावा और आडम्बर   के कारण परिवारों में तनाव का बातावरण बनता है और आपस में गलतफहमी हो जाती है I इस तनाव और ग़लतफ़हम...