गौ हत्या : एक विवेचन
हम हिन्दू गाय को माता समान मानते है इसलिये उन्हें गौमाता कहतें हैं। फिर भी स्वतंत्र भारत में भी हम गौमाता को कटते हुये देख रहे हैं। हम
अक्सर कहते सुनते हैं की गौ-हत्या बंद हो । गौ-हत्या कभी
धार्मिक तो कभी राजनैतिक मुद्दा बनता रहता है। हम कभी मुसलमानों को, कभी कसाइयों को तो कभी
वोट बैंक की राजनीती को इसके लिये जिम्मेदार ठहराते है। लेकिन सच्चाई तो ये है की हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है
और देश चलानेवालों को संविधान के दायरेमें रहकर ही देश चलाना पड़ता है। इस मुद्दे पर हमारा क़ानून कभी भी किसीको भी जोर
जबरदस्ती की इजाजत नहीं देता।
कोई ग्वाला जब एक गाय पालता है तो
उसका मकसद गाय की सेवा करना नहीं होता। वह
तो गाय को एक दूध बनाने वाली मशीन समझता है I जिस प्रकार हम व्यवसाय के लिए मशीन पर खर्च
करतें हैं, उसी प्रकार ग्वाला भी गाय से अधिक मात्रा में
दूध पाने के लिए खर्च करता है और जरुरत पड़ने पर
वह इसके लिये गाय पर अत्याचार भी करता है फिर चाहे वह ग्वाला हिन्दू हो या
मुसलमान। इसी प्रकार किसान भी अपने फायदे के लिए ही पशु पालता है I ऐसे में हम उन लोगों से यह अपेक्षा कैसे कर सकतें हैं की
वे लोग अनुपयुक्त बुढ़ी गायों को उनकी स्वाभाविक मृत्यु होने तक खर्च करके पालते
रहें । आज के जमाने जब लोग अपने
बुढ़े माता-पिता को ही अपने पास रखनेमे हिचकिचाते हैं तो उन गरीब ग्वालों या
किसानों के लिए बुढ़ी अनुपयुक्त गायों को पालना
कैसे संभव है ?
ऐसेमे प्रश्न उठता है की ग्वाले (या कोई और पशुपालक) अपनी बुढ़ी और अनुपयुक्त
गायों का क्या करें ? और उनके पास एक ही उत्तर होता है - वह है कसाई । हमारे देश की
जनसंख्या का ८० % हिस्सा है हिन्दु । अगर सिर्फ वोट बैंक की राजनीति की ही बात होती तो कौन सरकार नहीं चाहेगी की इस मुद्दे पर
८०% जनता को खुश रखा जाय। मतलब साफ़ है की
सरकार के पास इस समस्या का कोई हल नहीं है।
सही मायनेमे अगर हम इस समस्या का कोई हल निकालना चाहते है तो वह
हैं 'हमलोग' यानि हम ८०% जनता। अगर हममें दृढ़ निश्चय है और हम गाय को माता समझतें है व उनके प्रति
हममें सच्ची हमदर्दी है तो हम लोग काफी हद तक गौ माता की रक्षा कर सकतें हैं। उसका
सिर्फ एक ही उपाय है की हम उचित दाम देकर ग्वालों व किसानों से उनकी अनुपयुक्त व
बुढ़ी गायों को खरीदकर उन्हें कसाइयों के पास जाने से रोकें।
बड़ी बड़ी बातें करनेके की बजाय अगर हम
हिन्दू तैयार हो जायें की गौ-माता को अपने
खर्च से जीवनदान देंगे और हर सक्षम हिन्दू अपने जीवन काल में कम से कम एक बुढ़ी गाय का खर्च उठायेगा तो देखते ही देखते
सारे कसाईखाने अपने आप ही बंद हो जायेंगे। साथ
ही साथ गो-हत्या को लेकर राजनीति स्वतः
ही समाप्त हो जायेगी।
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