त्योंहार ‘प्यार’ का या ‘तनाव’ का

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षा बंधन का त्योंहार भाई बहन के प्रेम का प्रतिक हैं I इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी यानि रक्षा-सूत्र बांधती है और उनके माथे पर तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है I इस रक्षा सूत्र से बहने भाई के दीर्घ जीवन की कामना करते हुए भाई से अपनी रक्षा का वादा भी लेती है I भाई भी अपनी बहन की रक्षा के प्रतिक स्वरुप बहन को कुछ नगद रूपये देता है I यह था राखी का मूल स्वरुप जिसे हम सदियों से देखते आयें हैं I

लेकिन आजकल इस त्योंहार का स्वरुप  कुछ बदल गया है और आजकल बहने राखी के साथ काफी उपहार भी लाने लगी है I इन उपहारों में भाई के परिवार के छोटे बड़े सभी सदस्यों के लिये कुछ कुछ रहता है यानि बहने हजारों रूपये  उपहारों पर खर्च कर डालती है I इन उपहार रूपी दिखावा और आडम्बर  के कारण परिवारों में तनाव का बातावरण बनता है और आपस में गलतफहमी हो जाती है I

इस तनाव और ग़लतफ़हमी के तीन प्रमुख कारण है:-

    पहला कारण है की जिन बहनों के कई भाई होतें है वे सब भाइयों के लिये अलग अलग उपहार लाती है जो की  एक जैसे नहीं होते अपितु भाइयों के हैसियत के अनुसार होते हैं I

(   दूसरा,जिन भाइयों के कई बहने होती है पर बहनो की सामर्थ साधारणत: एक जैसी नहीं होती इसलिए वे बहने उपहार भी एक जैसा नहीं ला सकती, जिससे जब  भाइयों को उपहार दिये जातें है तो कीमती उपहार देने वाली बहन दिखा-दिखा कर देती है और कम उपहार लाने वाली  बहन छुपा-छुपा कर देती है I

        तीसरा कारण है की बहने कीमती उपहार तो ले आती है भाई अपने सामर्थ (या असमर्थता) देख कर मुसीबत में पड़ जातें है है की मैं कितना रुपया दूँ की बहनो  को अखरे; भाइयों में यह भी उपापोह रहता है की ज्यादा  उपहार वाली बहन को ज्यादा  दिया जाए या फिर सभी बहनों  को एक जैसा दिया जाय I

सार  यह है की बहनो  का लाया गया  उपहार ही सारे तनाव की जड़ है I अगर बहने उपहार ना लाये तो भाइयों  के ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी ना आये और भाई अपनी सभी बहनों (एक से अधिक हो तो) को  अपनी सामर्थ के अनुसार बराबर बराबर पैसा दे सके I हमें यह ध्यान रखना चाहिए की मूल रूप से त्योंहारों पर बहु, बहन, बेटी आदि को दिया गया उपहार महिलाओं का स्त्रीधन होता है ताकि खराब समय आने पर या लड़कियों की ब्याह में बड़े खर्चे के अवसर पर स्त्रियां भी कुछ योगदान कर सकें I अतः स्त्रियों को अपना स्त्रीधन बनाना चाहिए की उसे दिखावे में उड़ा देना चाहिये ?

रक्षा-बंधन भाई-बहन के  'प्यार' का त्योंहार है इसे बहने 'तनाव' का त्योंहार ना बनायें I बहनों के लिए यही उचित होगा की आडम्बर और हैसियत का दिखावा छोड़ दे और 'उपहार' के रूप में भाइयों पर आर्थिक बोझ ना बढ़ायें I रक्षा बंधन पर बहने राखी के अलावा एक नारियलएक छोटा मिठाई का डब्बा या एक दो फल , बच्चों के लिए एक दो टाफी या चॉकलेट बस और देखिए यह त्योंहार कितना 'मीठा' हो जाएगा I

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