जेनेरिक दवाइयां

                             
यह तो सभी जानते है की एक श्रेणी के  डाक्टर व दवाई निर्माता की मिली भगत से आम आदमी को नामी ब्रांड की दवाइयां  जेनेरिक दवाइयों से  ४-५ गुना दाम पर खरीदना पड़ता है जबकि काफी सस्ती होते हुए भी जेनेरिक दवाइयां गुणवत्ता में किसी भी ब्रांडेड (Branded) दवाइयों के बराबर की होती है I सवाल उठता है ऐसा क्यों ? उत्तर है एक श्रेणी के डाक्टारों को दिया जाने वाला ऊंचा कमीशन I यह कमीशन डाक्टर को दवा निर्माता कम्पनियों द्वारा नगदी में या फिर बंगला, गाडी, रिसार्ट में छुट्टी बिताने का खर्च यहां तक की विदेश भ्रमण के  खर्च के रूप में दिया जाता है I इसके अलावा दवाई  निर्माता कंपनियां भी ब्रांडेड दवाइयों में अच्छा खासा मुनाफा रखती है. नतीजा ? ब्रांडेड दवाइयों के आसमान छूते दाम जिनके बोझ तले आम आदमी पिसता रहता है I आप यह जान कर चकित रह जायेंगे की भारत को जेनेरिक दवाइयों के उत्पादन व निर्यात में विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त है और जेनेरिक दवाइयों में  विश्व के निर्यात की २० प्रतिशत भागीदारी अकेले  भारत की है I 
ऐसा नहीं है की भारत में जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध नहीं है I पर एक तो डाक्टर लोग प्रेस्क्रिप्शन में दवाइयों के  जेनेरिक नाम नहीं लिखतें दूसरी तरफ खुदरा दुकानदार डाकटरों  के प्रेस्क्रिप्सन की दवाइयां रखने को मजबूर हो जातें हैं  I इसी वजह से साधारणतया  खुदरा दुकानों में जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध नहीं होती I सिर्फ यही नहीं निहित स्वार्थों के चलते एक श्रेणी के डाकटर व दवाई निर्माता यह भी झूठा प्रचार करते है की जेनेरिक दवाइयों की क्षमता (Potency) कम होती है जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है और ब्रांडेड दवाइयां भी जेनेरिक दवाइयों से ही बनती है I यही वजह  है की हर ब्रांडेड दवाइयों के ऊपर उस दवाई का जेनेरिक नाम भी छोटे अक्षरों में लिखा रहता है I   
एक छोटे से उदाहरण से सब कुछ साफ़ हो सकता है I गैस-एसिडिटी  की एक बेहतर दवाई है pantoprazole ४० mg I निर्माता इस दवाई को ४५०० रुपये किलो में बेचता हैं अर्थात ४० mg का दाम हुवा १८ पैसे I इसको टेबलेट की साइज में बनाने  के लिए कुछ निर्दोष चीजे डाली जाती है जैसे चीनी, सोडियम आदि I इसके बाद इन टैबलेटों को पन्नी में डाल कर पैक किया जाता है और कुलखर्च ५०-७५  पैसे प्रति टेबलेट तक आ सकता है I जेनेरिक में यह दवाई बज़ार में रु १.५० से लेकर रु २.५० तक प्रति टेबलेट में उपलब्ध है जबकि  ब्रांडेड में यह टेबलेट ७.५ से ८.५ तक में मिलती है  I
अब रही बात जेनेरिक दवाइयों  की उपलब्धता की I   ख़ुशी की बात है की अब बंगाल में सरकारी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर में जेनेरिक दवाइयां खुदरा मूल्य के ५०- ७०.% छूट पर उपलब्ध है I आपको सिर्फ दवाई का जेनेरिक नाम जानने की जरुरत हैं I यह भी अति सरल है I आप जो ब्रांडेड दवाई खरीदें है उसपर ब्रांड के ऊपर  दवाई का जेनेरिक नाम भी लिखा होता है I या फिर अपना प्रेसक्रिप्शन लेकर जायें I  बस हो गया कामI सरकारी अस्पताल में जाकर अपना प्रेस्क्रिप्शन दिखाकर  या जेनेरिक नाम बताकर भी दवाई  ले सकतें है I निश्चिन्त रहिये जेनेरिक दवाई भी ब्रांडेड जैसी ही है कोई फर्क नहीं है I 
भारत सरकार भी 'जन औषधि' नाम से जेनेरिक दवाइयों के लिये दूकान  खोलने के लिये लाइसेंस दे रही हैं और उत्तर भारत में काफी जगहों पर ऐसी दुकाने खुल चुकी हैं I इन दुकानोमें जेनरिक दवाइयां बहुत ही सस्ती हैं I इस बारें में अधिक जानकारी के लिये  आप इंटरनेट पर janaushadhi.gov.in वेबसाइट देख सकतें हैं I इस वेबसाइट पर आप को सभी जेनेरिक औषधियों के दाम और कोड नंबर मिल जायेंगेI

Comments

Popular posts from this blog

आतंकवाद के बदलते चेहरे

क्या ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की बांग्लादेशी हिंदुओं के प्रति कोई जिम्मेदारी है?